24 October 2008

घमंडी पैसे वाले लोग


अगर किसी बात से मुझे ज्यादा दुःख होता है तो भारत की गरीबी देख कर।

इसीलिए मुझे यह पसंद नहीं आया की हिंदुस्तान ने चंद्रयान भेजा जबकि इतने लोग भूखे सोते हैं।

और हां हिंदुस्तान इसलिए भी गरीब है की पढ़े लिखे लोगों को कोई परवाह ही नही। देखो समीर रेड्डी क्या लिखते हैं न्यूजवीक पत्रिका में। उनका कहने का मतलब है की अगर भारत के प्रोफ़ेस्सिओनल्स और इन्दुस्त्रिअलिस्ट्स को कोई देश की परवाह नहीं तो इसमें कोई बुरी बात नहीं। इसीलिए तो Vogue पत्रिका ने गरीबों का मजाक उद्या उनको डिजाइनर वस्त्र पहना कर। शर्म आनी चाहियें इनको।

"The reality is that, for some Indians, the world has become a playground, and luxury goods that the West has coveted for generations are now within their grasp… Perhaps this particular story could have been handled differently, but the idea that a fashion editorial, or the eager consumption of luxury products by extension, plays any serious part in the problem of Indian poverty is ridiculous; overpopulation, underdevelopment, caste stigma and lack of adequate education infrastructure are more like it."

1 comment:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

गरीबी कहीं बिका करती है?