22 October 2008

चंद्रयान बहुत बढ़ी गलती

photo of indian moon mission launchक्योंकि में इंजिनियर हूँ विज्ञानं से मुझे बहुत प्रेम है। इसलिए अगर एक आमिर देश की बात होती तो में बहुत खुश होता लेकिन अगर हिंदुस्तान चंद्रमा पर विमान भेज रही है तो मेरा दिल टूट गया।

बहुत से लोग ये भूल जाते हैं की भारत में दुनिया के सबसे ज्यादा गरीब लोग रहते हैं। इतनी उन्नति के बाबजूद भी कमसे कम ४५०,०००,००० लोग एक दिन में एक डॉलर से कम पर जिंदगी बिताते हैं। इस तरह पैसा बर्बाद करना ठीक नहीं। इस तरह की रिसर्च से कोई फायदा नहीं। क्योंकि पाकिस्तानियों के पास लढाई करने के आलावा और कोई काम नही भारत सुरक्छा पर ही इतने पैसा बर्बाद करता है पर चंद्रयान से तो एइसा भी कोई फायदा नहीं।

अगर चीनी लोगों को घमंड है तो होने दो। इस समाया पैसा लगना चाहिए सड़क या पीने का पानी या गरीबों के लिए नौकरी या गाँव में बिजली। इस तरह की टेक्नोलॉजी इतनी महंगी है की अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देश भी सोच समझ के पैसा खर्च करते हैं। ये नेता लोग तो पागल हो गए हैं।

7 comments:

गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" said...

sahi hai bhai ji

adwet said...

संजय जी आपकी बात सही हो सकती है। जाहिर पैसा खुद उड़ कर चंद्रमा पर नहीं जा रहा, इस पैसे से ऐरोनॉटिक इंजीनियर्स को काम मिल रहा है। जहां कल-पुर्जे बन रहें है, वहां रोजगार के अवसर पैदा कर रहा है। हमारे पास पैसे की मात्रा की कमी नहीं है, यहां इन्फलेशन रेट दो अंकों में है। कमी है पैसे के परिचालन वेग की यानी सर्कुलेशन आफ मनी की। यानी पैसा एक हाथ से दूसरे हाथ में डालर जितनी तेजी से नहीं जा रहा। यह तभी संभव होगा कि जब पैसा बेरोजगार न रहे। यदि एक रुपया दिन आपकी जेब में पड़ा रहता है तो वह दस दिन बेरोजगार रहता है। वहीं यदि यह एक रुपया एक दिन में ही दस हाथों से गुजर जाए तो उसका दैनिक मूल्य दस रुपये के बराबर होगा। यानी उसने बाजार में उतनी खरीद-फरोख्त में काम किया जितना एक बार में एक दस का नोट करता।
सुधीर राघव

विजय ठाकुर said...

द्विवेदी जी आपने जो बताया वो बात सही है कि हिंदुस्तान को शिक्षा, सड़क, बिजली, पानी इत्यादि पर व्यय करने की बहुत जरूरत है लेकिन साथ में यह जो हो रहा है वह भी बहुत जरूरी है। आज आईटी उद्योग की बदौलत भारत अपना विदेशी मुद्रा का भंडार भर रहा है और साथ ही आईटी का लाभ खेती से लेकर अन्य क्षेत्रों तक में धीरे धीरे पहुँच रहा है। ये सिर्फ़ गर्व करने वाली बात नहीं है ठीक आईटी उद्योग की तरह अंतरिक्ष तकनीक में यह एक तरह का निवेश समझिए जिसका फ़ायदा थोड़े ही समय में दिखाई देगा। इससे न सिर्फ़ भारत तथाकथित तीसरी दुनिया के देशों को अपनी इस क्षेत्र में अपनी सस्ती तकनीकी सेवा दे सकेगा बल्कि उसकी जबर्द्स्त कमाई भी होगी। इंजिनियर होने के नाते आप अगर कोई और वजह बताते तो बात शायद समझ आती आप पश्चिम के इस तर्क में मत उलझिए कि भारत के ज्यादतर लोग रोजाना एक "डॉलर" से भी कम कमाते हैं।

Arvind Mishra said...

शुभ शुभ बोलो भाई -आज ही वह ऐतिहासिक उड़ान है !

अनुनाद सिंह said...

संजय जी,

आप के उपरोक्त विचारों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें व्यावहारिकता गायब है। कहते हैं कि पैसे से ही पैसा कमाया जाता है। (मनी बिगेट्स मनी) । इसी तरह प्रौद्योगिकी का भी हाल है। हम चंद्रमा पर नही जा सकते तो मंगल पर कैसे जा पायेंगे? हमे सायकिल चलाने नहीं आता तो मोटरसायकिल कैसे चला सकते हैं?

हर तकनीकी में अनेकों उपयोग छिपे रहते हैं। इस तकनीकी से भी हमारी सुरक्षा तकनीकी को जबरजस्त बल मिलेगा। भारतीय इंजीनयरों का मनोबल आसमान छूने लगेगा ( जो कि कुछ वर्ष पहले तक रसातल में था)।

आप को याद होगा कि चीनी आक्रमण के पहले तक नेहरू का विचार था कि हमे बन्दूक बनाने से क्या लाभ है? हमे इनमे कपड़े सिलने चाहिये।
क्या हुआ इस विचार का?

Zakir Ali 'Rajneesh' said...

हॉं भाईसाहब, लेकिन आपने एक बात पर ध्‍यान नहीं दिया, इससे भारत उसे बेहद मुनाफे वाले क्षेत्र में भी प्रवेश कर रहा है, जिसपर अभी तक अमेरिका और रूस का कब्‍जा था।

संजय बेंगाणी said...

आपकी सोच को प्रणाम. काश दूरदृष्टि से सोचा होता.