15 October 2008

हिन्दुस्तानी शादी अमेरिका में

जब मेने हिंदुस्तान छोड़ा तो मेने सोचा कि भारतीय रिवाज़ छोड़ कर अमेरिका की रिवाज़ पकड़ लो अगर यह नही करो तो हिंदुस्तान छोड़ने की जरुरत ही नहीं है इसलिए आज मुझमे और एक अमेरिकन में शायद कोई फरक नहीं है और मुझे इस बात का गर्व है

पर ऐसा मालूम होता है कि एइसा सोचने वालों कि गिनती बहुत कम है इतने सारे हिन्दुस्तानी लोग यहाँ आकर और ज्यादा भारतीय बन जाते हैं जबकि भारत में मेरे परिवार के लोगों के नाम आजकल Tanya या Daisy या Tina हैं पर यहाँ पर हिन्दुस्तानियों के नाम हैं अभिषेक या विराज या सम्राट कभी कभी तो मुझे पूछना पड़ता कि यह शब्द कौनसी भासा क्या है बड़ा आश्चर्य होता है कि यह नाम संस्कृत से आया या किसी ११ शताब्दी के ऋषि का नाम है

एइसे ही लोगों में हैं न्यू यार्क के राहुल सिद्दार्थ और सपना चौधरी जिनकी शादी अभी हुई लॉन्ग इस्लंद में एकिक किले में दूल्हे रजा हाथी पे चडके आया बरात में जब तस्वीर देखि तो हस्ते हस्ते पेट में दर्द होने लगा एइसा लगा जैसे कोई बम्बैया फ़िल्म थी यह लोग भारत छोड़ दिया लेकिन दिल भारत में ही है अरे पागलो इतनी ही हिंदुस्तान कि याद आती हे तो वहां चले क्यों नही जाते आजकल वहां तो माल भी हैं और जो चीजे यहाँ मिलती है वहां भी मिलती हैं पर सस्ती

photo of desi dulha riding an elephant
snap of an indian bride and groom
picture of an indian girl in sari dancing
pic of an indian man dancing in barat

8 comments:

महाबीर सेठ said...

बात कुछ हजम नहीं हुई । द्विवेदी जी आप अमेरिका में हैं, इसका मतलब यह नहीं होना चाहिए कि भारत हिंदोस्तान को भूल जाएं । घर से बाहर रह कर घर की ज्यादा याद आती है...
आप तो देश छोड़ विदेश चले गए हैं, लेकिन मैंने अपना प्रदेश अपनी मातृभूमि छोड़ी है । फिर भी दिल नहीं मानता....
रही बात आप की हिंदी लिखने की, सो बहुत अच्छी हिंदी लिख रहें हैं आप ...
आप जरूर लिखें, अमेरिका में भारत अच्छा है....

शोभा said...

बधाई हो.

Kavi Deepak Sharma said...

Jis raah par har baar mujhe apna hi koi ghalta raha,
phir bhi naa jaane kiyon us raah hi chalta raha.
Socha bahut is baar to rooshni nahi dhuyan doonga,
Lekin chiragh tha phitaratan jalta raha,jalta raha.

AAP KA SWAGAT HAI..........
KAVI DEEPAK SHARMA
http://www.kavideepaksharma.blogspot.com
http://shauardeepaksharma.blogspot.com
http://www.kavideepaksharma.co.in

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

vaah! ये भी खूब रही।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

अपना देश कोई नहीं भूलता।

प्रदीप मानोरिया said...

बधाई आपका चिठ्ठा जगत में स्वागत है . मेरे ब्लॉग पर दस्तक देकर देखें अन्दर कैसे व्यंग और गीत रखे हैं

विनीता यशस्वी said...

Baat To sach mai hajam nahi ho rahi hai janab. koi kahi bhi jaye apni root se kat nahi sakta hai.
agar aap videsh mai hi paida hua hote aur yaha baat likhte to samjhe aati par aap to bharat mai paida hua.

विनीता यशस्वी said...

baat to sach mai hajam nahi ho rahi hai. agar aap videsh mai hi paida hote aur tab aisa likhte to shayad kuch samjha aata par aap to shayad bharat mai hi paida hua.