29 October 2008

मेने दीपावली कैसे माने और क्या खाया पिया

कल दिवाली मनाई। क्योंकि अमेरिका में दिवाली के दिन छुट्टी नहीं होती तो इसलिए थोड़ा मुश्किल तो होता है लेकिन श्रीमतीजी ने कहा की मानतें हैं। सुबह सुबह अपने परिवार वालों से टेलीफोन पर बात की। शोर तो इतना था की बात ज्यादा नही हुई तब भी अच्छा लगा। शोचा की आप लोगों को फोटो दिखाऊँ।

सबसे पहले दिनिंग टेबल की सजावट। थोडी मोम बत्ती भी जलाई टेबल के बीच में। और हिंदुस्तान में ख़रीदा दुपट्टा टेबल को सजाने के लिए इस्तेमाल किया। photo of dining table at my home on diwali nightअब देखो क्या पकाया और खाया। स्काल्लोप्स से कर्री बने और उसको अवोकेडो के साथ खाया। पता नहीं हिंदुस्तान में लोग कैसे स्काल्लोप्स पकातें हैं लेकिन कर्री मसाला बनके उसको स्काल्लोप्स से मिलाया। और हाँ अवोकेडो तो हम लोगों को पसंद है।Picture of scallops curry cooked Indian styleफ़िर बनाया अविअल। साउथ इंडियन डिश है। Snap of avial a south Indian dishजैसा देखोगे Charles Shaw red wine के साथ खाया। आख़िर में मैंने गाजर का हलवा बनाया जैसे की मेरी नानी बनती थीं। यहाँ की गाजर उतनी मीठी नही होती लेकिन कोन्देंसेद मिल्क से मीठी हो गई। फिर मुनक्के और बादाम दाल के स्वादिष्ट हो गया। और हाँ श्रीमतीजी ने उसको दिल की तरह काटा।
Pict of gazar halwa

दिवाली अमेरिका में

Photo of Yahoo diwali home page greetingसबसे पहले आप सबको दिवाली की शुभकामनायें। लेकिन सबसे बढ़ा आश्चर्य जब हुआ जब मेने देखा की अमेरिका में भी Yahoo के होम पेज पर दिवाली की बधाई थी। आजकल एईसी टेक्नोलॉजी है की वेबसाइट वालों को पता होता है की आप किस देश से आयें हैं लेकिन में अमेरिका में भी देखा की एक दीपक जलाके उन्होंने हम लोगों को बधाई दी। ये तब की अमेरिका में सिर्फ़ १% जनसँख्या हिंदुस्तान से है।

25 October 2008

ओबामा या मकेन

आजकल अमेरिका में चुनाव की वजह से बढ़ी रौनक है क्योंकि शायद अमेरिका में पहली बार एक अफ्रीकन अमेरिकन राष्ट्रपति बनेगा। करीब ४० वर्ष अफ्रीकन अमेरिकन लोग बस में सफ़ेद लोगों के साथ नही जा सकते थे और हिन्दुस्तानी अछूतों की तरह कोई तरक्की नहीं कर सकते थे। इसलिए राष्ट्रपति बन जन बहुत बढ़ी बात है।

तो मैंने सोचा की हिंदुस्तान में कुछ तो लोग सोच रहें होंगे अमेरिका के बारे में पर गालुप की रिसर्च से पता लग रहा है की भारत में तो किसी को कोई परवाह ही नहीं जबकि आजकल हिंदुस्तान इतना व्यापर अमेरिका के साथ करता है और जब अमेरिका और हिंदुस्तान ने अभी नुक्लेअर त्रेअटी दस्तखत की तो लोग बढे खुश थे।

इतनी कम रूचि क्यों? एसा लगता है की टेलिविज़न पर कोई ख़बर ही नहीं। एउरोपे, जापान और कोरिया में सब लोग ओबामा को चाहते हैं। में भी.

विक्टोरिया बेककहम साडी में

Snap of Victoriya Beckam in a sariमुहे अभी तक याद है की मेरे परिवार में जितनी भी महिलाएं थी उनकी सबसी बढ़ी शिकायत थी की साडी पहन कर कुछ काम नही कर सकते। इसलिए १९७० के आसपास सलवार कुरते का रिवाज आया।

पर ये बात मानने पढेगी की साडी से सुंदर कोई और वस्त्र हिंदुस्तान में नहीं। और अब देखो पोश स्पिस (Posh Spice, Victoria Beckham) को भी साडी का शोक हो गया।

24 October 2008

घमंडी पैसे वाले लोग


अगर किसी बात से मुझे ज्यादा दुःख होता है तो भारत की गरीबी देख कर।

इसीलिए मुझे यह पसंद नहीं आया की हिंदुस्तान ने चंद्रयान भेजा जबकि इतने लोग भूखे सोते हैं।

और हां हिंदुस्तान इसलिए भी गरीब है की पढ़े लिखे लोगों को कोई परवाह ही नही। देखो समीर रेड्डी क्या लिखते हैं न्यूजवीक पत्रिका में। उनका कहने का मतलब है की अगर भारत के प्रोफ़ेस्सिओनल्स और इन्दुस्त्रिअलिस्ट्स को कोई देश की परवाह नहीं तो इसमें कोई बुरी बात नहीं। इसीलिए तो Vogue पत्रिका ने गरीबों का मजाक उद्या उनको डिजाइनर वस्त्र पहना कर। शर्म आनी चाहियें इनको।

"The reality is that, for some Indians, the world has become a playground, and luxury goods that the West has coveted for generations are now within their grasp… Perhaps this particular story could have been handled differently, but the idea that a fashion editorial, or the eager consumption of luxury products by extension, plays any serious part in the problem of Indian poverty is ridiculous; overpopulation, underdevelopment, caste stigma and lack of adequate education infrastructure are more like it."

22 October 2008

चंद्रयान बहुत बढ़ी गलती

photo of indian moon mission launchक्योंकि में इंजिनियर हूँ विज्ञानं से मुझे बहुत प्रेम है। इसलिए अगर एक आमिर देश की बात होती तो में बहुत खुश होता लेकिन अगर हिंदुस्तान चंद्रमा पर विमान भेज रही है तो मेरा दिल टूट गया।

बहुत से लोग ये भूल जाते हैं की भारत में दुनिया के सबसे ज्यादा गरीब लोग रहते हैं। इतनी उन्नति के बाबजूद भी कमसे कम ४५०,०००,००० लोग एक दिन में एक डॉलर से कम पर जिंदगी बिताते हैं। इस तरह पैसा बर्बाद करना ठीक नहीं। इस तरह की रिसर्च से कोई फायदा नहीं। क्योंकि पाकिस्तानियों के पास लढाई करने के आलावा और कोई काम नही भारत सुरक्छा पर ही इतने पैसा बर्बाद करता है पर चंद्रयान से तो एइसा भी कोई फायदा नहीं।

अगर चीनी लोगों को घमंड है तो होने दो। इस समाया पैसा लगना चाहिए सड़क या पीने का पानी या गरीबों के लिए नौकरी या गाँव में बिजली। इस तरह की टेक्नोलॉजी इतनी महंगी है की अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देश भी सोच समझ के पैसा खर्च करते हैं। ये नेता लोग तो पागल हो गए हैं।

17 October 2008

हिन्दुस्तानी म्क्दोनाल्ड्स का खाना ख़राब है

photo of mcdonalds indian menuमैं यह बात घमंड में नही कह रहा की में अमीर हूँ। सच तो यह है कि बचपन से ही में हल्का खाना खता हूँ। मेरे नानाजी आयुर्वेद के वैद्य थे और परिवार में कई लोग डॉक्टर हैं। इसलिए मुझे तले हुए भोजन या मिठाई ज्यादा पसंद नहीं। इसी वजह से में घर से बाहर कम खता हूँ और अगर रेस्तौरांत में जाऊँ भी तो हलकी चीज़ें खाता हूँ। इसलिए मेरे पसंद का भोजन है: जापानी या विएतनामी।

और हाँ फास्ट फ़ूड तो समझो बिल्कुल ही नहीं खाता। जब दुनिया में कुछ भी खाने को नहीं होता, जैसे कि कार में लम्बी यात्रा करो जब सिर्फ़ रेस्ट एरिया में ही खाना खा सकते हैं, तभी म्क्दोनाल्ड्स में जाते हैं। एइसा क्यों? एक म्क्दोनाल्ड्स के खाने में उतनी कैलोरी होती जितनी हमें पूरे दिन में खानी चाहिए। इसीलिए अमेरिका ज्यादातर लोग इतने मोटे हैं कि देश में एक स्वास्थ्य का संकट आया हुआ। कितने ही लोगो को दिल कि बीमारी है। चिंता मत करो मुझे कोई बीमारी नहीं।

इसलिए इस बार वसंत में जब भारत गया तो बड़ा आश्चर्य हुआ। जीसी से मिलो वो कहे कि अरे म्क्दोनाल्ड्स में मिलो या माल में खाने चलो। में तो उन लोगो में से हूँ जो म्क्दोनाल्ड्स या मॉल में सिर्फ़ साल ३-४ बार खाते हैं। अब मन भी करो तो चक्कर, अगर ये कहो कि ये खाना अच्छा नहीं है क्योंकि इतनी कैलोरी हैं तो भी चक्कर और अगर ये कहो कि फास्ट फ़ूड गरीब लोगों के लिए है और ठीक ठाक लोग रेस्तौरांत में खाते है तो बे चक्कर क्योंकि सब कहेंगे कि घमंड हो गया अमेरिका जाके। और क्योंकि म्क्दोनाल्ड्स अमेरिका कि कंपनी है तो सब सोचते कि यह ही खाना हम खाते है और येही हमें पसंद है।

सच पूछो तो मुझे घर का खाना सब से ज्यादा पसंद है। हम तो हर चीज़ अपने आप बनातें हैं जैसे मेरी नानी गांव में बनातीं थीं। और आजकल तो हम ओर्गानिक सब्जियां और गोश्त खरीदतें हैं।

मेरी या सलाह है कि अगर आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान है तो फास्ट फ़ूड साल में १-२ बार तो ठीक है, उस है उस से ज्यादा नहीं। मुझे पता है कि हिन्दुस्तानी रसोई में खाना बनाना कितना मुश्किल है पर फास्ट फ़ूड में पैसा बर्बाद करने से अच्छा तो नया रसोई बनाओ। हिंदुस्तान में लोगों को यह ग़लत विचार है की अमेरिका तो सब लोग सिर्फ़ बना बनाया खाना खातें है। हाँ अगर आप इतने आलसी हैं की सिर्फ़ डिब्बा खोल के माइक्रोवेव में गरम करके खाना छाहते तो एसा कर सकते हो पर हम लोग तो साल में एक दो बार ही डिब्बे का खाना खाते हैं.

16 October 2008

ईसाईयों पर अत्याचार भारत में

शायद जब में १० साल का था तबसे में नास्तिक हूँ। इसलिए हिंदुयों से मुझे इतना प्यार या नफरत है जितनी किसी और धर्मं से। आजकल यहाँ पर हिंदुस्तान में हिंदू लोगों जे ईसाईयों पर जो अत्याचार किये हैं वो ठीक नहीं। गलती दोनों की है की झगडा इतना बढ़ गया पर ये बात पक्की है कि हिंदू लोगो को ये पसंद नहीं कि इसाई लोग हिंदुयों का धर्म परिवर्तन करते है, अक्सर पैसा या कोई और लालच देकर।

यहाँ पर हर इसैघर में हर इतवार को पैसा इकठ्ठा किया जाता है जो फिर गरीब देशों में भेजा जाता ताकि और धर्म के लोगों को इसाई बना दे। यह धर्म ही एसा है। जो बदलने में सफल होता है, समझा जाता है, कि स्वर्ग के रास्ते अंपने आप खुल जाते हैं। कई धर्म परिवर्तन के नेता लोग टीवी पर बोलते हैं कि भारत के लोगों तो अंधकार से रौशनी दिखाने का कम उनका है।

पर हिंदू लोग क्यों धर्मं बदलते हैं?

ज्यादातर लोगो इतने गरीब हैं कि जब उनको कों पैसा या इज्जत दिखाता है तो एइसा लगता है कि उनकी साड़ी समस्या सावधान हो जायेंगी। आखं हमारे जैसे ब्राह्मणों ने उनके ऊपर हजारों साल अत्याचार किये हैं। मुझे अभी अभी भी याद है कि अगर किसी अछूत ने हम बच्चों को छूया तो मेरी मम्मी पानी के तिनके डाल के कुछ मंत्र पढ़ती थीं।

मेरी आप लोगो से विनती है कि सब हिंदुयों को बराबर आदर करें। अगर एकिक ब्रह्मण और चमार या भंगी में कोई फरक नहीं तो फिर ये क्यों दूसरा धरम पक्धेंगे। और अगर हम लोग एइसा नही करने को तैयार हैं तो हर हिंदू को ये अधिकार है कि वो किसी बे धर्म के हो जाएँ और फिर उनके ऊपर हिंदू धर्म के रिवाज़ नहीं चलेंगे।

और ये काम आप जैसे पढ़े लिखे लोग नहीं करेंगे तो अनपढ़ लोग किसे करेंगे?

15 October 2008

हिन्दुस्तानी शादी अमेरिका में

जब मेने हिंदुस्तान छोड़ा तो मेने सोचा कि भारतीय रिवाज़ छोड़ कर अमेरिका की रिवाज़ पकड़ लो अगर यह नही करो तो हिंदुस्तान छोड़ने की जरुरत ही नहीं है इसलिए आज मुझमे और एक अमेरिकन में शायद कोई फरक नहीं है और मुझे इस बात का गर्व है

पर ऐसा मालूम होता है कि एइसा सोचने वालों कि गिनती बहुत कम है इतने सारे हिन्दुस्तानी लोग यहाँ आकर और ज्यादा भारतीय बन जाते हैं जबकि भारत में मेरे परिवार के लोगों के नाम आजकल Tanya या Daisy या Tina हैं पर यहाँ पर हिन्दुस्तानियों के नाम हैं अभिषेक या विराज या सम्राट कभी कभी तो मुझे पूछना पड़ता कि यह शब्द कौनसी भासा क्या है बड़ा आश्चर्य होता है कि यह नाम संस्कृत से आया या किसी ११ शताब्दी के ऋषि का नाम है

एइसे ही लोगों में हैं न्यू यार्क के राहुल सिद्दार्थ और सपना चौधरी जिनकी शादी अभी हुई लॉन्ग इस्लंद में एकिक किले में दूल्हे रजा हाथी पे चडके आया बरात में जब तस्वीर देखि तो हस्ते हस्ते पेट में दर्द होने लगा एइसा लगा जैसे कोई बम्बैया फ़िल्म थी यह लोग भारत छोड़ दिया लेकिन दिल भारत में ही है अरे पागलो इतनी ही हिंदुस्तान कि याद आती हे तो वहां चले क्यों नही जाते आजकल वहां तो माल भी हैं और जो चीजे यहाँ मिलती है वहां भी मिलती हैं पर सस्ती

photo of desi dulha riding an elephant
snap of an indian bride and groom
picture of an indian girl in sari dancing
pic of an indian man dancing in barat