26 August 2008

सुंदर बीबी

एक आदमी सुपरमार्केट में पागलों तरह भाग रहा था तो उसकी एक दूसरे आदमी से टक्कर हो गई।

"अरे माफ़ कीजिये, मैंने आपको टक्कर मार दी। असल में में अपनी बीबी को ढूँढ रहा हूँ," दूसरा आदमी बोला।

"में भी। इसीलिए तो पगला रहा हूँ," पहला आदमी बोला।

"अरे आपकी बीबी केसी है," उसने पूछा।

"सुनहरे बाल, नीली आँखे, लम्बी, पतली, बड़े बड़े स्तन, और मिनी स्कर्ट पहने हुए। बड़ी सुंदर है। और आपकी बीबी?" पहला आदमी बोला।

"अरे मेरी बीबी को भूल जाओ, में भी आपकी बीबी को ही ढूँढ ता हूँ।"

बुद्धिमान मर्द शादी नही करते

एक लड़की ने भगवन की बढ़ी पूजा की और जब भगवन प्रसन्न हो गए तो दर्शन दिए और पूछा कि उस्खो क्या छाहिये। "प्रभु सिर्फ़ एक बुध्हिमान आदमी से शादी करवा दो ताकि ज़िन्दगी भर चेन से रहू और बच्चे भी होशियार पैदा हों।

"अरे पगली," भगवान बोले, "बुद्धिमान मर्द शादी थोडी न करते हैं।"

22 August 2008

सिंह इस किंग फ़िल्म

ना तो मैंने अक्षय कुमार का नाम सुना है ना कैटरिना हैफ (Katrina Haif) का लेकिन उनके बारे में न्यू यार्क टाईम्स (The New York Times) में पढ़ा जब स्नूप दोग्ग के ऊपर समाचार आया कि वो अब बॉलीवुड में काम कर रहा है। स्नूप दोग्ग का संगीत हर किसी को पसंद नहीं आता पर मुझे तो पचासिओं बैंड्स का संगीत सुनने का शौक है। कभी कभी सुनता स्नूप दोग्ग (Snoop Dogg) को भी। थोड़ा ढूंढ़ना तो पड़ा पर एक इन्टरनेट रेडियो स्टेशन पर गाना सुना। बड़ा मज़ेदार है।

फ़िर थोडी सिंह इस किंग (Singh is Kingg) कि जानकारी की। ये कैटरिना कौन है? में तो सोचता था कि मिनी स्कर्ट तो हिंदुस्तान में गैर कानूनी है। इतना छोटा! तौबा तौबा। अगर ये परिवर्तन १९९० में आगया होता तो भारत छोड़ने कि जरुरत ही नहीं थी। और हाँ, रिक्शा चलाने वाले तो सीटी सीटी मारते मारते थक जायेंगे इस पिक्चर को देखते देखते। अगर ज्यादा शोर हो तो कान बंद कर लेना नहीं तो फट जायेंगे।
photo of akshay kumar and katrina haif in a mini skirt in the movie singh is kingg

21 August 2008

गूगल अद्सेस्न्से हिन्दी में

मेने सारी ज़िन्दगी अंग्रेज़ी में पढ़ाई करी। अब अमेरिका में रहता हूँ। क्योकि मेरी धरम पत्नी अमेरिकन है में हिन्दी में सिर्फ़ तभी बात करता हूँ जब में हिंदुस्तान जाता हूँ या टेलीफोन करता हूँ। इसके बाबजूद भी मुझे हिन्दी से प्यार है और हिन्दी में ब्लॉग करने में आनंद आता है।

लेकिन लगता है किं भारत में भारतियों को हिन्दी से उतना प्यार नहीं। इस ब्लॉग को शुरू करने के बाद जब गूगल अद्सेंसे विज्ञापन लगाये तो एक भी विज्ञापन हिन्दी में नहीं दीखता (हो सकता हे की अगर आप भारत में हों तो हिन्दी में विज्ञापन दिख रहें हों; अगर ऐसा है तो कृपया करके कमेन्ट या ईमेल कर के मुझे बतादें)।

मुझे जब चिंता हुई तो एक दो लोगों से बात की। एसा लगता हे कि जेसे हिंदुस्तान में जो लोग इन्टरनेट या कंप्यूटर इस्तेमाल करते हैं वो अंग्रेज़ी जानते हैं या अंग्रेज़ी जानने की कोशिश कर रहें हैं। हो सकता है की वो हिन्दी फ़िल्म देखते हैं और संगीत भी हिन्दी में सुनते है या दादी और नानी से टूटी फूटी हिन्दी बोलते हैं क्योंकि अंग्रेज़ी बोलने से मतलब हे किं वो बड़े आदमी हे या माडर्न हैं और बाकी हिंदुस्तानिओं से अच्छे हैं।

मैंने पता लगाया की हिन्दी दुनिया में #३ भाषा है, अंग्रेज़ी और चाइनीज के बाद। अंदाजा है की कम से कम ४००,०००,००० लोग हिन्दी बोलते हैं। अक दूसरे अंदाज़ के अनुसार सिर्फ़ ३% लोग दोनों हिन्दी और अंग्रेज़ी बोल सकते हैं। में जानता हूँ की मेरे बीसियों रिशेदार कुछ अंग्रेज़ी के शब्द बोल और समझ सकते हैं पर जहाँ तक बोलने और पढने की बात है हिन्दी ही उनके लिया बढ़िया है।

हो सकता है किं कुछ महीनो भारत कि व्यापारी लोगों को थोडी अकाल आएगी और आप लोगों कि लिए हिन्दी के वेबसाइट बनायेंगे और विज्ञापन भी लगायेंगे।

लेकिन चिंता मत करो; विज्ञापन हों या नही, में तब भी ब्लॉग करूँगा।

18 August 2008

ऐश्वर्या राइ उन्फोर्गेत्ताब्ले टूर

इस शनिवार को न्यू यार्क सिटी के नस्सु स्टेडियम में अमिताभा बच्चन के साथ उनका बेटा और बेटे की बीबी ऐश्वर्य राइ सबने एकिक रंग रंग कार्यक्रम किया। पता नहीं में किस दुनिया मैं रहता हूँ -- मुझे तो पता भी नहीं चला। अगर न्यू यार्क टाईम्स में नही ख़बर आती तो मुझे पता भी नहीं चलता। वेसे भी मस्सचुसेत्त्स से न्यू यार्क सिटी ३०० किलोमीटर से भी ज्यादा दूर है और फिर हिन्दी फिल्मों से तो मेरा रिश्ता बिल्कुल ख़तम सा ही हो गया है।

हिंदुस्तान छोड़ने के बाद २ या ३ ही हिन्दी फिल्में देखि हैं मैंने। अमिताभा बच्चन तो थोड़ा पसंद था जब में बच्चा था और गब्बर सिंह को मरने वाला अच्छा लगता था पर ऐश्वर्या राइ तो बिल्कुल बे पसंद नहीं। अभी कुछ महीने पहले उसको मिस्ट्रेस ऑफ़ स्पाइसेज़ में देखा और लगा की इस सुंदर लड़की को एक्टिंग नही आती।

ये देखो कुछ फोटो उस शाम से।

16 August 2008

मेरी पहली पोस्ट

वो, ये तो एकदम जादू किया गूगल ने। मुझे तो विश्वास बे नही हो रहा की में हिन्दी में अपने विचार व्यक्त कर सकता हूँ।

भारत छोड हुए १६ साल हो गए, कभी कभी तो एसा लगता है जैसे के में हिन्दी भूल गया लेकिन लगता है की अगर हिन्दी लिखता रहूँ तो अपने दिल की बात कह सकता हूँ।

तो मेरे प्यारे दोस्तों सुनूँ मेरी कहानी हिन्दी में। गुस्सा नो होना अगर गल्ती कर दूँ क्योंकि मासूम हूँ।

और हाँ कृपया कर के अपने कमेन्ट जरुर छोड़ दो.